मुंगेर से “सम्राट” तक —
बिहार को मिला 24वाँ मुख्यमंत्री
15 अप्रैल 2026 — आज वह दिन है जिसका इंतजार सम्राट चौधरी ने वर्षों तक किया, जब एक पगड़ी की शपथ, एक संकल्प और दशकों के संघर्ष ने इतिहास रच दिया।
बिहार की राजनीति के इतिहास में 15 अप्रैल 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। आज सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर न केवल अपना संकल्प पूरा किया, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ा — क्योंकि वे BJP के पहले ऐसे नेता बने जो बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचे।
सम्राट चौधरी
मुंगेर के लखनपुर से शुरू हुई महागाथा
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवम्बर 1968 को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर गाँव में हुआ। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के एक स्तंभ थे — सात बार विधायक और सांसद रहे। माँ पार्वती देवी ने 1998 में समता पार्टी से तारापुर सीट जीती। यानी यह परिवार बिहार की राजनीतिक मिट्टी में रचा-बसा था।
राजनीति उन्हें विरासत में मिली — लेकिन उनकी राह फूलों की सेज नहीं थी। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा मदुराई कामराज विश्वविद्यालय से प्राप्त की। बचपन से ही उन्होंने बिहार के जाति-समीकरणों, ग्रामीण राजनीति और सत्ता के दाँव-पेंच को समझा। 1990 के दशक में वे सक्रिय राजनीति में उतरे — और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
राजनीतिक परिवार की तीन पीढ़ियाँ: शकुनी चौधरी (पिता, 7 बार MLA-MP), पार्वती देवी (माँ, 1998 विधायक), और सम्राट चौधरी (पुत्र, 24वें मुख्यमंत्री) — मुंगेर की यह परिवारी विरासत बिहार की राजनीति का एक अनूठा अध्याय है।
सबसे युवा मंत्री — और पहला बड़ा झटका
1999 में राबड़ी देवी की सरकार ने युवा सम्राट चौधरी को बागवानी, तौल एवं माप मंत्री बनाया। वे उस समय सबसे कम उम्र के मंत्री थे — एक उपलब्धि जो किसी के लिए भी गर्व की बात होती।
लेकिन राजनीति में हर उड़ान के साथ एक परीक्षा भी आती है। 16 नवम्बर 1999 को — जो उनका जन्मदिन भी था — उन पर आरोप लगा कि मंत्री बनते समय उनकी आयु 25 वर्ष से कम थी, इसलिए वे अयोग्य थे। राज्यपाल के निर्देश पर उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा।
यह उनके जीवन का सबसे कठिन क्षण था — अपने ही जन्मदिन पर मंत्री पद खोना। लेकिन इसी झटके ने उन्हें समय से पहले परिपक्व बनाया। उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि वापसी के लिए खुद को और मजबूत किया।
दिलचस्प तथ्य: सम्राट चौधरी का असली नाम राकेश कुमार है। राजनीतिक जीवन में उन्होंने “सम्राट” नाम से पहचान बनाई — और आज वे सचमुच बिहार के “सम्राट” बन गए।
RJD से BJP तक — एक राजनेता का विकास
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर बिहार की तीन बड़ी धाराओं — RJD, JD(U) और BJP — से होकर गुजरा है। यह यात्रा केवल पार्टी बदलने की नहीं, बल्कि एक राजनेता के वैचारिक परिपक्वता की कहानी है।
1999 में RJD के साथ शुरुआत → 2000 और 2010 में परबत्ता से MLA → 2014 में JD(U) सरकार (जीतन राम माँझी) में नगर विकास मंत्री → 2017 में BJP में शामिल → 2021 में पंचायती राज मंत्री → 2022 में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष → 2023 में प्रदेश अध्यक्ष → 2024 में उपमुख्यमंत्री → 2026 में मुख्यमंत्री।
2017 में BJP में शामिल होने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा। 2023 में बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ पार्टी ने उन्हें अपना “OBC चेहरा” घोषित किया। कोईरी-कुशवाहा समुदाय में उनकी पकड़ और आक्रामक नेतृत्व शैली ने BJP को एक नई पहचान दी।
2024 में NDA का गठबंधन पुनर्स्थापित होने के बाद वे उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री बने। गृह विभाग में उन्होंने “Zero Tolerance Against Crime” की नीति अपनाई — Anti-Romeo Squad, ड्रग माफिया पर कार्रवाई और जेल निगरानी। यह उनके भावी नेतृत्व का पूर्वाभ्यास था।
पगड़ी की भीष्म प्रतिज्ञा — और उसकी विजय
जब नीतीश कुमार ने 2022 में BJP का साथ छोड़कर RJD के साथ सरकार बनाई, तो सम्राट चौधरी ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे बिहार का ध्यान खींचा।
— सम्राट चौधरी, 2022
22 महीने तक वे पगड़ी पहनकर पूरे बिहार में घूमे। यह केवल एक राजनीतिक प्रतीक नहीं था — यह एक जनसंदेश था। आज 15 अप्रैल 2026 को, जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उस पगड़ी का संकल्प पूर्ण हुआ।
संघर्ष से शिखर तक — यात्रा के प्रमुख पड़ाव
🌱 सक्रिय राजनीति में प्रवेश
समता पार्टी के साथ राजनीतिक जीवन की शुरुआत। परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने का संकल्प।
समता पार्टी⚡ सबसे युवा मंत्री — और पहला झटका
राबड़ी देवी की सरकार में बागवानी मंत्री बने। बिहार के सबसे युवा मंत्री। लेकिन उम्र-विवाद के चलते उसी जन्मदिन (16 नवंबर) को पद से इस्तीफा देना पड़ा।
इस्तीफा · उम्र-विवाद🏆 परबत्ता से पहली विधानसभा जीत
RJD के टिकट पर परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। झटके के बाद तेज वापसी।
MLA · RJD🔄 दूसरी बार परबत्ता से विजय
पुनः परबत्ता से विधायक। बिहार विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक (Chief Whip) बने।
MLA · Chief Whip🏛️ माँझी सरकार में नगर विकास मंत्री
जीतन राम माँझी की सरकार में नगर विकास एवं आवास मंत्री। विधान परिषद के सदस्य भी बने।
मंत्री · JD(U)🚩 BJP में ऐतिहासिक प्रवेश
भारतीय जनता पार्टी में शामिल। बिहार BJP के उपाध्यक्ष बने। पार्टी ने उन्हें OBC समुदाय का प्रमुख चेहरा बनाया।
BJP · OBC चेहरा🎗️ पगड़ी की भीष्म प्रतिज्ञा
नीतीश कुमार के BJP से अलग होने पर सार्वजनिक प्रतिज्ञा — “पगड़ी तब उतारूँगा जब भाजपा सरकार बनाऊँगा।” विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष।
पगड़ी संकल्प · नेता प्रतिपक्ष👑 बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष
मार्च 2023 में बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष बने। पार्टी को आक्रामक नई पहचान दी। गृह मंत्री अमित शाह का विश्वास अर्जित किया।
प्रदेश अध्यक्ष · BJP🏠 उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री
NDA गठबंधन पुनर्स्थापित होने पर 28 जनवरी 2024 को उपमुख्यमंत्री बने। वित्त, गृह, स्वास्थ्य सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी।
उपमुख्यमंत्री · NDA🎉 बिहार के 24वें मुख्यमंत्री — शपथ-ग्रहण
15 अप्रैल 2026 को लोक भवन, पटना में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने शपथ दिलाई। JP नड्डा, चिराग पासवान, शिवराज सिंह चौहान सहित NDA के सभी विधायक उपस्थित। BJP के पहले बिहार मुख्यमंत्री।
मुख्यमंत्री · ऐतिहासिकगृह मंत्री के रूप में क्या किया?
उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने Bihar में कई महत्वपूर्ण पहल कीं जिन्होंने उन्हें “Yogi Model of UP” की तर्ज पर बिहार का कानून-व्यवस्था चेहरा बनाया।
Zero Tolerance Against Crime
बेगूसराई में शिवदत्त राय जैसे गैंगस्टरों पर सख्त पुलिस कार्रवाई। UP के योगी मॉडल की तर्ज पर क्रिमिनल गैंग्स के खिलाफ मुहिम।
Anti-Romeo Squad
सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए “Pink Policing” और Anti-Romeo Squad की तैनाती।
माफिया के खिलाफ कार्रवाई
ड्रग माफिया, शराब तस्करी और भूमि-कब्जा गिरोहों के खिलाफ 400 लोगों की सूची तैयार — अवैध संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया।
पुलिस परिवारों के लिए आवासीय स्कूल
दिसंबर 2025 में 40 पुलिस लाइनों में आवासीय स्कूल खोलने की घोषणा। पुलिसकर्मियों के लिए कैशलेस मेडिकल बीमा।
वह ऐतिहासिक क्षण — लोक भवन, पटना
बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने लोक भवन में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर JP नड्डा, चिराग पासवान, शिवराज सिंह चौहान सहित NDA के सभी विधायक उपस्थित थे।
सम्राट चौधरी के साथ JD(U) के विजय कुमार चौधरी और बृजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। नितीश कुमार ने जो राजनीतिक उत्तराधिकार का क्षण तैयार किया, वह आज पूर्ण हुआ।
ऐतिहासिक उपलब्धि: सम्राट चौधरी बिहार के पहले BJP मुख्यमंत्री बने — यह न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत है, बल्कि बिहार में दशकों के JDU-RJD वर्चस्व के बाद BJP की ऐतिहासिक सफलता भी है।
मुंगेर का बेटा — बिहार का सम्राट
सम्राट चौधरी की कहानी केवल एक राजनेता के सफर की कहानी नहीं है। यह उस जिजीविषा की कहानी है जो अपने ही जन्मदिन पर पद खोने के बाद भी नहीं टूटती, जो पगड़ी बाँधकर 22 महीने तक पूरे बिहार में घूमती है, और जो अंततः इतिहास रचती है।
उनके सामने अब चुनौतियाँ कम नहीं हैं। नीतीश कुमार की “सुशासन” विरासत को आगे ले जाना, बिहार में उद्योग और निवेश लाना, और NDA गठबंधन की जटिल राजनीति को संभालना — ये सब बड़ी परीक्षाएं हैं।
लेकिन जिसने 1999 की हार से सबक सीखा, 2022 की चुनौती में पगड़ी बाँधी और 2026 में इतिहास रचा — उससे बिहार को बड़ी उम्मीदें हैं।
Politico Insights का विश्लेषण: सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा यह सिखाती है कि आधुनिक लोकतंत्र में धैर्य, सही समय का इंतजार, और जनाधार से जुड़ाव ही सफलता की असली कुंजी है। उनका OBC आधार, आक्रामक शैली और “विकास + कानून-व्यवस्था” का एजेंडा — यह त्रिकोण बिहार की राजनीति को नई दिशा देगा।
बिहार की राजनीति पर गहरी नजर
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